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News Today - जानलेवा बैक्टीरिया पर आखिरी ' दवाभी बेअसर अस्पताल में होने वाले মম্ন संक्रमण केलिए जिम्मेदार होतेहैं मोदस्सिर खान "lddc' वाराणसी| अस्पतालों में तेजी से बैक्टीरिया  কলন নাল নানলনা 'যমযাননম' इस बैक्टीरिया के ५० बैवटीरिया के सामने अब कोलिस्टिन सेअधिक नमूनों की जैसी आखिरी दवाभोबेअसरहो रही यह स्थिति भविष्य में मरीजों के गहनजांच कीगई इलाज में बड़ी चुनौती बन सकती है बीएचयू  कारखेंखासध्यान आइएमएस ক্তু8বানী माइक्रोबायोलोजी विभागके विशेषज्ञों के मुताबिक, अस्पतालों में एंटीबायोटिक स्टेवार्डशिप प्रोग्राम को सख्ती से गोपालनाथ के शोध में यह जानकारी  लागू करना बहुत जरूरी है। बिना चिकित्सक की सलाह के दवा लेने पर रोक  सामने आई है।इसमें पाया गया कि इस  लगाई जाए। सॅक्रमण नियंत्रण के नियमों का पालन हा ओर नई दवाओं तथा  बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक दवाओं के वेकल्पिक उपचारों पर शोघ को बढ़ावा दिया जाए। इसके अलावा मरीजों को पूरा  प्रति प्रतिरोध का स्तर ० ६ सेज्यादा है, दवा कोर्स खत्म करने के लिए जागरूक किया जाए। अस्पतल मै नियमित जांच यानी दवाओंकाअसरकमहो गयाहै। ओर निगरानी से दवा - प्रतिरोध के मामलों पर नजर रखी जाए। स्वास्थ्यकर्मियों को एंटरोबैक्टर  संक्रमण का कारण हाथों की सफाई ओर स्वच्छता के नियमों का पालन करना चाहिए  बैकटीरिया आमतौर पर आंतों मेंरहता है लेकिन जिन लोगों को प्रतिरोधक क्षमता  दवाओं के प्रतिरोधी हो चुके हैं।इन पर  कमजोर होती है ( जैसे आईसीयू में भर्ती " किया गया।यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल सेफ्ट्रियाक्सोन  सिप्रोफ्लॉक्सासिन  मरोज औरसर्जरी केबादकेरोगी ) उनमें दमाइक्रोब ( एलजिविययर ) मेंप्रकाशित निमोनिया, सेप्सिस एमिकासिन और पाइपरासिलिन ।इसमें एंटीबायोटिक दवाओं का वघाव क हुआहै यह संक्रमण का कारण बन सकता है। टैजोबैक्टम जैसी दवाओं का असर भी जरूरत से ज्यादा उपयोग इसको वजह एंटरोबैक्टर बैक्टोरिया के ५० से ज्यादा  नहोंदिखा। माना गया है। इसके साथ गलत डोज चिंताजनक  नमूनों की जांच हुई। १० फीसदी से बात : कुछ मामलों में  अधूराइलाजऔर अस्पतालोंमेंसंक्रमण " अधिक नमूनों में मल्टी ्ड्रग रेजिस्टेंस  आखिरीविकल्पकेतीरपरदीजानेवालो  नियंत्रण केउपायोंकोकमी केकारण भी देखा गया, यानी ये बैक्टोरिया प्रमुख  कोलिस्टिन दवा के प्रति भी प्रतिरोध दर्ज  समस्या बढ़रहीहै। जानलेवा बैक्टीरिया पर आखिरी ' दवाभी बेअसर अस्पताल में होने वाले মম্ন संक्रमण केलिए जिम्मेदार होतेहैं मोदस्सिर खान "lddc' वाराणसी| अस्पतालों में तेजी से बैक्टीरिया  কলন নাল নানলনা 'যমযাননম' इस बैक्टीरिया के ५० बैवटीरिया के सामने अब कोलिस्टिन सेअधिक नमूनों की जैसी आखिरी दवाभोबेअसरहो रही यह स्थिति भविष्य में मरीजों के गहनजांच कीगई इलाज में बड़ी चुनौती बन सकती है बीएचयू  कारखेंखासध्यान आइएमएस ক্তু8বানী माइक्रोबायोलोजी विभागके विशेषज्ञों के मुताबिक, अस्पतालों में एंटीबायोटिक स्टेवार्डशिप प्रोग्राम को सख्ती से गोपालनाथ के शोध में यह जानकारी  लागू करना बहुत जरूरी है। बिना चिकित्सक की सलाह के दवा लेने पर रोक  सामने आई है।इसमें पाया गया कि इस  लगाई जाए। सॅक्रमण नियंत्रण के नियमों का पालन हा ओर नई दवाओं तथा  बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक दवाओं के वेकल्पिक उपचारों पर शोघ को बढ़ावा दिया जाए। इसके अलावा मरीजों को पूरा  प्रति प्रतिरोध का स्तर ० ६ सेज्यादा है, दवा कोर्स खत्म करने के लिए जागरूक किया जाए। अस्पतल मै नियमित जांच यानी दवाओंकाअसरकमहो गयाहै। ओर निगरानी से दवा - प्रतिरोध के मामलों पर नजर रखी जाए। स्वास्थ्यकर्मियों को एंटरोबैक्टर  संक्रमण का कारण हाथों की सफाई ओर स्वच्छता के नियमों का पालन करना चाहिए  बैकटीरिया आमतौर पर आंतों मेंरहता है लेकिन जिन लोगों को प्रतिरोधक क्षमता  दवाओं के प्रतिरोधी हो चुके हैं।इन पर  कमजोर होती है ( जैसे आईसीयू में भर्ती " किया गया।यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल सेफ्ट्रियाक्सोन  सिप्रोफ्लॉक्सासिन  मरोज औरसर्जरी केबादकेरोगी ) उनमें दमाइक्रोब ( एलजिविययर ) मेंप्रकाशित निमोनिया, सेप्सिस एमिकासिन और पाइपरासिलिन ।इसमें एंटीबायोटिक दवाओं का वघाव क हुआहै यह संक्रमण का कारण बन सकता है। टैजोबैक्टम जैसी दवाओं का असर भी जरूरत से ज्यादा उपयोग इसको वजह एंटरोबैक्टर बैक्टोरिया के ५० से ज्यादा  नहोंदिखा। माना गया है। इसके साथ गलत डोज चिंताजनक  नमूनों की जांच हुई। १० फीसदी से बात : कुछ मामलों में  अधूराइलाजऔर अस्पतालोंमेंसंक्रमण " अधिक नमूनों में मल्टी ्ड्रग रेजिस्टेंस  आखिरीविकल्पकेतीरपरदीजानेवालो  नियंत्रण केउपायोंकोकमी केकारण भी देखा गया, यानी ये बैक्टोरिया प्रमुख  कोलिस्टिन दवा के प्रति भी प्रतिरोध दर्ज  समस्या बढ़रहीहै। - ShareChat