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जब भी छोटी थी ऐसे हीं गांव में पेड़ के नीचे खटिया डाल के नानी मौसी, माई मामा के साथ सो जाती थी और जब अपने गांव होती थी तो अपने घर नहीं मोहल्ले की बुआ के साथ सोती थी मम्मी के पास बहुत कम रही बुआ के साथ खाती घूमती सोती फिर नानी के साथ नानी को नहीं छोड़ती थी मम्मी जब भी लेने आती नानी के साथ हीं रहना है #☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - येथावो दौरजबरिश्ते दिल से निभाएजाते थेदिये की रोशनीमें किस्से कहानिया औरदिलके हालबाताए जाते थेतबअरहकार नहीं अपनापन बसता थादिलों में और समय देकरहररिश्ता फूलों की तरह खिलता था W৫IT 0000 येथावो दौरजबरिश्ते दिल से निभाएजाते थेदिये की रोशनीमें किस्से कहानिया औरदिलके हालबाताए जाते थेतबअरहकार नहीं अपनापन बसता थादिलों में और समय देकरहररिश्ता फूलों की तरह खिलता था W৫IT 0000 - ShareChat