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#✍️ अनसुनी शायरी #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🥰Express Emotion
✍️ अनसुनी शायरी - ट्ूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी अंतरकीचीर व्यथा पलकों परठिठकी हार नहीं मानूँगा , रार नई ठानूँगा काल के कपालपे लिखता मिटाता हूँ गीत नया गाता हूँा अटल बिहारी वाजपेयी ट्ूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी अंतरकीचीर व्यथा पलकों परठिठकी हार नहीं मानूँगा , रार नई ठानूँगा काल के कपालपे लिखता मिटाता हूँ गीत नया गाता हूँा अटल बिहारी वाजपेयी - ShareChat