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Shayari - उलझते जज़्बात वही जज़्बात ग़लत हो जाते हैं॰ शन्द कभी कभी सही बातों के हालात गलत हो जाते हैं शायद यही है लफ्जों कि उलझन, वक्त के साथ वो भी॰ उलझने को तैयार खड़े हो जाते है। उलझते जज़्बात वही जज़्बात ग़लत हो जाते हैं॰ शन्द कभी कभी सही बातों के हालात गलत हो जाते हैं शायद यही है लफ्जों कि उलझन, वक्त के साथ वो भी॰ उलझने को तैयार खड़े हो जाते है। - ShareChat