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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह
✍मेरे पसंदीदा लेखक - चौहान उपेक्षा -सुभद्रा gHT इस तरह उपेक्षा मेरी , क्यों करते हो मतवाले! आशा के कितने अंकुर , मैंने हैं उर में पाले।। विश्वास-्वारि से उनको , मैंने है सींच बढ़ाए। निर्मल निकुंज में मन के, हूँ सदा छिपाए।। रहती कुछ आँच न उनमें आए। मेरे मेरी साँसों की लू से, अंतर की ज्वाला, उनको न कभी झुलसाए।। कितने प्रयत्न से उनको , मैं हृदय ्नीड़ में अपने , बढ़ते लख खुश होती थी, देखा करती थी सपने।। इस भांति उपेक्षा मेरी , करके मेरी अवहेला, 377 आशा की कलियाँ मसलीं खिलने की बेलाII चौहान उपेक्षा -सुभद्रा gHT इस तरह उपेक्षा मेरी , क्यों करते हो मतवाले! आशा के कितने अंकुर , मैंने हैं उर में पाले।। विश्वास-्वारि से उनको , मैंने है सींच बढ़ाए। निर्मल निकुंज में मन के, हूँ सदा छिपाए।। रहती कुछ आँच न उनमें आए। मेरे मेरी साँसों की लू से, अंतर की ज्वाला, उनको न कभी झुलसाए।। कितने प्रयत्न से उनको , मैं हृदय ्नीड़ में अपने , बढ़ते लख खुश होती थी, देखा करती थी सपने।। इस भांति उपेक्षा मेरी , करके मेरी अवहेला, 377 आशा की कलियाँ मसलीं खिलने की बेलाII - ShareChat