23 मार्च… वो दिन जब भारत ने अपने सबसे बहादुर बेटों को खो दिया… 🇮🇳 जब पूरा देश अंग्रेजों के डर में जी रहा था,
तब एक नौजवान खुलेआम कह रहा था —
“धर्म से बड़ा देश होता है… मातृभूमि सबसे ऊपर होती है…”
सिख धर्म में बाल कटवाना वर्जित माना जाता है,
लेकिन देश के लिए उन्होंने अपनी पहचान तक बदल दी…
और फिर वही जज़्बा —
“मैं बाल ही नहीं, जरूरत पड़ी तो गर्दन भी कटवा सकता हूँ…”
23 मार्च 1931 की वो रात…
जब अंग्रेजों ने डर के मारे तय समय से पहले ही
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फाँसी दे दी।
उन्होंने सोचा था कि वो तीन जिंदगियाँ खत्म कर देंगे…
लेकिन वो भूल गए —
क्रांतिकारी मरते नहीं, इतिहास बन जाते हैं।
आज हम जिस आज़ादी की हवा में सांस ले रहे हैं,
वो किसी की कुर्बानी की कीमत पर मिली है…
इसलिए आज सिर्फ पोस्ट मत पढ़ो…
उनके सपनों को समझो, और देश के लिए कुछ करने का जज़्बा जगाओ।
शत-शत नमन उन अमर शहीदों को… 🙏🔥
#BhagatSingh 💕✍️ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान


