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#🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️ #🌙रात की शायरी✍ #✍️ साहित्य एवं शायरी #💔दर्द भरी कहानियां #✍मेरे पसंदीदा लेखक
🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️ - मैं गांठ हृदय की खोलूं क्या कांधे सिर रख कर रो लूं क्या तुम आँखों से सब पढ लो ना मैं आखिर मूंह से बोलूं क्या ये इश्क.. मुहब्बत.. प्यार.. वफ़ा নুম ত্ীভ যৎ. ম ৌী লুঁ বসা कुछ दूर अभी अँधियारा है मैं साथ तुम्हारे हो लूं क्या _uitn_ कुछ रंग उभर के आएंगे आँखों में सपने घोलूं क्या अब शायद लौट ना।पाऊं मैं गहरी नींद मैं सो लूं क्या एक मैं गांठ हृदय की खोलूं क्या कांधे सिर रख कर रो लूं क्या तुम आँखों से सब पढ लो ना मैं आखिर मूंह से बोलूं क्या ये इश्क.. मुहब्बत.. प्यार.. वफ़ा নুম ত্ীভ যৎ. ম ৌী লুঁ বসা कुछ दूर अभी अँधियारा है मैं साथ तुम्हारे हो लूं क्या _uitn_ कुछ रंग उभर के आएंगे आँखों में सपने घोलूं क्या अब शायद लौट ना।पाऊं मैं गहरी नींद मैं सो लूं क्या एक - ShareChat