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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - ন ভ্রননা  अपनों तन्हा कर दिया की हम अपने राज़ गैरों से खोल बैठे | ೪9೧ ন ভ্রননা  अपनों तन्हा कर दिया की हम अपने राज़ गैरों से खोल बैठे | ೪9೧ - ShareChat