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#✍️ विचार #✍️सुविचार #☺चांगले विचार #☺️उच्च विचार ✿•┅━꧁🌹सुप्रभात 🌹꧂━┅•✿ ✿ शनिवार दि. ०७ फेब्रुवारी २०२६✿ ✿ माघ शु. षष़्ठी २०८२✿ ✿शिवशक ३५२✿ ✿•••┈┅━꧁ ۩🌟۩ ꧂━┅┈•••✿ ஜ۩۞۩ संस्कृत सुभाषितमाला ۩۞۩ஜ ✿•••┈┅━꧁ ۩🌟۩ ꧂━┅┈•••✿ प्रवृत्तवाक् विचित्रकथ ऊहवान् प्रतिभानवान्। आशु ग्रन्थस्य वक्ता च यः स पण्डित उच्यते ॥ भावार्थ : जो व्यक्ति बोलने की कला में निपुण हो, जिसकी वाणी लोगों को आकर्षित करे, जो किसी भी ग्रंथ की मूल बातों को शीघ्र ग्रहण करके बता सकता हो, जो तर्क-वितर्क में निपुण हो, वही ज्ञानी है । ✿•••┈┅━꧁ ⚜️ ꧂━┅┈•••✿