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#✝यीशु वचन
✝यीशु वचन - फ़रवरी "क्योंकि यहोवा धर्मी हैः वह धर्म के कामों से प्रेम रखता है; सीधे लोग उसका मुख देखेंगे। " भजन संहिता ११:७ सृष्टिकर्ता हमसे वास्तव में क्या चाहता है? क्योंकि परमेश्वर धर्मी HRT है वह उन कार्यों में प्रसन्न होता है जो उसके स्वभाव को प्रकट करते 8_4/ जो सीधे न्यायपूर्ण और सच्चे हों। ऐसा जीवन जो कार्य परमेश्वर को प्रसन्न करे केवल होंठों की बातों पर नहीं टिक सकता जबकि हृदय अपरिवर्तित बना रहे। हमारे खोखले शब्द, धार्मिक दिखावा या बाहरी रीति रिवाज़ लगातार पाप में लिप्त रहने के लिए आवरण नहीं बन सकते। फिर भी जब हम अपने आप को ईमानदारी से परखते हैं तो हमारे कार्य प्रकट कर देते हैं कि हमारे हृदय घमंड, स्वार्थी महत्वाकांक्षा वासना और छिपे हुए विद्रोह में उलझे रहते हैं । अपने बल पर हम उस स्तर तक नहीं पहुँच सकते जिसे परमेश्वर प्रेम करता है। परन्तु यही हमारी आशा हैः धर्मी परमेश्वर दयालु और अनुग्रहकारी भी है। वह उन लोगों का स्वागत करता है जो बहाने बनाकर नहीं बल्कि सच्चे मन से उसकी खोज करते हैं पश्चाताप में क्षमा है, समर्पण में ಥಾvfಕ ಕ है, और आज्ञाकारिता में प्रतिज्ञा है।जो धर्म का अनुसरण हैं वे केवल परमेश्वर के बारे में जानेंगे ही नहीं-वे उसकी महिमा का दर्शन भी करेंगे। सिर्फ एक आवाज  Hindi फ़रवरी "क्योंकि यहोवा धर्मी हैः वह धर्म के कामों से प्रेम रखता है; सीधे लोग उसका मुख देखेंगे। " भजन संहिता ११:७ सृष्टिकर्ता हमसे वास्तव में क्या चाहता है? क्योंकि परमेश्वर धर्मी HRT है वह उन कार्यों में प्रसन्न होता है जो उसके स्वभाव को प्रकट करते 8_4/ जो सीधे न्यायपूर्ण और सच्चे हों। ऐसा जीवन जो कार्य परमेश्वर को प्रसन्न करे केवल होंठों की बातों पर नहीं टिक सकता जबकि हृदय अपरिवर्तित बना रहे। हमारे खोखले शब्द, धार्मिक दिखावा या बाहरी रीति रिवाज़ लगातार पाप में लिप्त रहने के लिए आवरण नहीं बन सकते। फिर भी जब हम अपने आप को ईमानदारी से परखते हैं तो हमारे कार्य प्रकट कर देते हैं कि हमारे हृदय घमंड, स्वार्थी महत्वाकांक्षा वासना और छिपे हुए विद्रोह में उलझे रहते हैं । अपने बल पर हम उस स्तर तक नहीं पहुँच सकते जिसे परमेश्वर प्रेम करता है। परन्तु यही हमारी आशा हैः धर्मी परमेश्वर दयालु और अनुग्रहकारी भी है। वह उन लोगों का स्वागत करता है जो बहाने बनाकर नहीं बल्कि सच्चे मन से उसकी खोज करते हैं पश्चाताप में क्षमा है, समर्पण में ಥಾvfಕ ಕ है, और आज्ञाकारिता में प्रतिज्ञा है।जो धर्म का अनुसरण हैं वे केवल परमेश्वर के बारे में जानेंगे ही नहीं-वे उसकी महिमा का दर्शन भी करेंगे। सिर्फ एक आवाज  Hindi - ShareChat