संस्कृति का इस तरह व्यापार अब होने लगा
साज कहीं और है सामान कहीं और है
ढूँढ रहे चश्मे को बिना लगाये चश्मा ही
आँख कहीं और है पहचान कहीं और है #📚कविता-कहानी संग्रह #कविता #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍मेरे पसंदीदा लेखक


