यह किसी के मन की बातें हैं... !!
कैसे हम तुमको समझायें
क्या तुमको आभास नहीं है
तन तो रह लेता है तुम बिन
पर मन को अभ्यास नहीं है।
बिना तुम्हारे दीवाना फागुन भी मुझे चिढ़ाये
नयनों का सावन बोलो कैसे तुमको दुलराये
यादों के झुरमुट से हम जब भी तुम्हें निहारें
गालों पर आंसू की भीनी पड़ने लगी फुहारें
उँगली पर दिन गिनते हैं कब से तुमसे नहीं मिले
मौसम के गालों पर दो डिम्पल कब से नहीं खिले
जीवन रूप अलंकृत करने
को तुम सा अनुप्रास नहीं है।
तन तो रह लेता है तुम बिन
पर मन को अभ्यास नहीं है।
मंदिर खड़ी मनौती करती कई जनम की बातें
धागों में बाँधी है हमने प्रीत भरी सौगातें
भावों का ज्वार उठा जब याद हुई पूरनमासी
इस बैरागी मन को जैसे भाया हो संन्यासी
प्रेम तुम्हारा ध्यान लगाये बैठा जैसे साधू
जाने कैसा सम्मोहन है, जाने कैसा जादू
एक तुम्हारे प्रेम से बढ़कर
जीवन में संन्यास नहीं है।
तन तो रह लेता है तुम बिन
पर मन को अभ्यास नहीं है।
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #💓 मोहब्बत दिल से #सिर्फ तुम #😘बस तुम और मैं #🌙 गुड नाईट


