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#शाकंभरी पौष पौर्णिमा🌕
शाकंभरी पौष पौर्णिमा🌕 - 03 0AN দীপ দুঁপিসা uiq स्ान दान जपतप और की अत्यत पावन तिथि मानी जाती पूर्णिमा ; आत्मशुद्धि है। इस दिन प्रातःकाल किसी पविन्न नदी या जल में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देने, fu' या नारयण का पूजन करने तथा तिल॰ कंबल॰ अन्न और बस्त्र का दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता हे। शास्त्रों के अनुसार पौष पूर्णिमा पर किया गया दान सामान्य दिनों की तुलना में कईुना फल देता है और पितृ दोष दोष तथा दरिद्रता शनि ' इससे से जुड़ी बाधाएं शांत होती है। यह तिथि मन॰ चाणी और कर्म की शुद्धि का अवसर देती है॰ जिससे साधक के जीनन में सकारात्मकता, स्नास्थ्य और आध्यात्मिक स्थिरता विकास होता है। 03 0AN দীপ দুঁপিসা uiq स्ान दान जपतप और की अत्यत पावन तिथि मानी जाती पूर्णिमा ; आत्मशुद्धि है। इस दिन प्रातःकाल किसी पविन्न नदी या जल में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देने, fu' या नारयण का पूजन करने तथा तिल॰ कंबल॰ अन्न और बस्त्र का दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता हे। शास्त्रों के अनुसार पौष पूर्णिमा पर किया गया दान सामान्य दिनों की तुलना में कईुना फल देता है और पितृ दोष दोष तथा दरिद्रता शनि ' इससे से जुड़ी बाधाएं शांत होती है। यह तिथि मन॰ चाणी और कर्म की शुद्धि का अवसर देती है॰ जिससे साधक के जीनन में सकारात्मकता, स्नास्थ्य और आध्यात्मिक स्थिरता विकास होता है। - ShareChat