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कविता हेच माझे जग .
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धीरे धीरे सब छोड रहा मै .. फिर क्यु दौंड रहा हू मै .. दिल है की मानता ही नहीं.. खुद हे क्यु लढ रहा हू मै ..
#📝कविता / शायरी/ चारोळी
#कविता_हेच_माझे_जग
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