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#वाह वाह जिंदगी
वाह वाह जिंदगी - विशेष कविताः रत्नों का दान जो करते हैं, वही सच्चे महादानी हैं बाप समान उदारचित बन, रचते नई राजधानी हैं। के मोह को तज  सब रगें अब तोड़ दो ব্ুনিমা पुरानी  एक पिता की याद में रहकर, नाता रूहानी जोड़ दो।  सेवा का ऐसा शौक रहे, जो नींद चैन को भुला दे, ज्ञान अंजन और याद के बल से, सोई तकदीर जगा ೩1 क्यों और क्या के जाल को काट, स्वदर्शन चक्र फिराओ , प्लेन बुद्धि और निर्मल मन से, कर्मातीत बन जाओ। ओम् शान्ति विशेष कविताः रत्नों का दान जो करते हैं, वही सच्चे महादानी हैं बाप समान उदारचित बन, रचते नई राजधानी हैं। के मोह को तज  सब रगें अब तोड़ दो ব্ুনিমা पुरानी  एक पिता की याद में रहकर, नाता रूहानी जोड़ दो।  सेवा का ऐसा शौक रहे, जो नींद चैन को भुला दे, ज्ञान अंजन और याद के बल से, सोई तकदीर जगा ೩1 क्यों और क्या के जाल को काट, स्वदर्शन चक्र फिराओ , प्लेन बुद्धि और निर्मल मन से, कर्मातीत बन जाओ। ओम् शान्ति - ShareChat