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#☝रहीम की सीख🌟
☝रहीम की सीख🌟 - रहिमन निज मन की व्यथा, मन में राखो गोय। सुनि इठलैहैं लोग सब, बाटि न लैहै कोय II अर्थ : रहीमदास जी इस दोहे में हमें अपने मन को अपने मन में ही रखना चाहिए के दुख 1 क्योंकि दुनिया में कोई भी आपके दुख को बांटने वाला नहीं है। इस संसार में बस लोग के दुख को जान कर उसका मजाक दूसरों उड़ाना जानते हैं | रहिमन निज मन की व्यथा, मन में राखो गोय। सुनि इठलैहैं लोग सब, बाटि न लैहै कोय II अर्थ : रहीमदास जी इस दोहे में हमें अपने मन को अपने मन में ही रखना चाहिए के दुख 1 क्योंकि दुनिया में कोई भी आपके दुख को बांटने वाला नहीं है। इस संसार में बस लोग के दुख को जान कर उसका मजाक दूसरों उड़ाना जानते हैं | - ShareChat