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#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - नारी सबकी नजरों से बचकर निकली हूं घर से अकेली कुछ दूर जाकर पता चला बहुत मुश्किल हैं सफ़र मेरा मगर हारी नही रास्ते कोी बाधाओं से लड़ती रही अपनों और परायों से एक दिन दिखा दूंगी आईना इस तक़दीर को नारी हूं चीर दूंगी मुश्किलों के गुरुर को संगम सिंह नारी सबकी नजरों से बचकर निकली हूं घर से अकेली कुछ दूर जाकर पता चला बहुत मुश्किल हैं सफ़र मेरा मगर हारी नही रास्ते कोी बाधाओं से लड़ती रही अपनों और परायों से एक दिन दिखा दूंगी आईना इस तक़दीर को नारी हूं चीर दूंगी मुश्किलों के गुरुर को संगम सिंह - ShareChat