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#❤️जीवन की सीख #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️जीवन की सीख - "सदा न संग सहेलियाँ, सदा न राजा देश। सदा न जुग में जीवणा, सदा न काला केश।  सदा न फूलै केतकी, सदा न सावन होय।  सदा न विपदा रह सके, सदा न सुख भी होय। सदा न मौज बसन्त री॰ सदा न ग्रीष्म भाण। सदा न जोवन थिर रहे, सदा न संपत माण। सदा न काहू की रही, गल प्रीतम की बांह। ढ़लते ढ़लते ढ़ल गई, तरवर की सी छाँह। " "सदा न संग सहेलियाँ, सदा न राजा देश। सदा न जुग में जीवणा, सदा न काला केश।  सदा न फूलै केतकी, सदा न सावन होय।  सदा न विपदा रह सके, सदा न सुख भी होय। सदा न मौज बसन्त री॰ सदा न ग्रीष्म भाण। सदा न जोवन थिर रहे, सदा न संपत माण। सदा न काहू की रही, गल प्रीतम की बांह। ढ़लते ढ़लते ढ़ल गई, तरवर की सी छाँह। " - ShareChat