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मैने उसे देखा ___
न किसी आसमान की ऊँचाई में,
न किसी मन्दिर की मूर्ति में,
बल्कि एक साधारण मनुष्य के भीतर,
जहाँ धैर्य ने गुस्से को हरा दिया।
वो नहीं झुकता किसी लाभ के आगे,
न बोलता, जब सब चिल्ला रहे होते हैं,
बस खड़ा रहता __स्थिर,निर्विकार,
जैसे तूफ़ान के बीच कोई दीपक जलता हो।
उसकी आँखों में कोई युद्ध नहीं,
सिर्फ़ एक शान्त भरोसा है __समय भी,
झुकेगा कभी उसके सत्य के आगे।
तब जाना मैंने,
ईश्वर आकाश में नहीं बसते,
कभी - कभी वे इन्सान बन कर,
धैर्य और संतुलन की तरह खड़े रहते हैं।
🙏 सुप्रभात 🙏 #🌞 Good Morning🌞

