लंबे समय तक ऑक्सीडेटिव तनाव और बाहरी आक्रामक तत्वों के संपर्क में रहने से त्वचा पर स्पष्ट प्रभाव दिखाई देने लगते हैं। त्वचा की प्राकृतिक चमक कम हो जाती है और रंगत फीकी व असमान दिखने लगती है, क्योंकि मृत कोशिकाएँ सतह पर जमा हो जाती हैं।
कोलेजन और इलास्टिन फाइबर को नुकसान पहुँचने से त्वचा की कसावट और लचीलापन घटता है, जिससे झुर्रियाँ और महीन रेखाएँ जल्दी उभरने लगती हैं।
साथ ही, त्वचा की सुरक्षात्मक बाधा कमजोर हो जाती है, जिससे प्रदूषण, बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक तत्व आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। यह कमजोरी त्वचा की नमी को बनाए रखने की क्षमता को भी कम कर देती है, जिससे निर्जलीकरण बढ़ता है। यह पूरा प्रक्रिया एक नकारात्मक चक्र बनाती है, जो त्वचा की उम्र बढ़ने की गति को और तेज कर देती है।
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