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#bhakti #sesh bhakti
bhakti - हरि शरणं प्रातः स्मरामि भवभीतिमहार्तिशान्त्यै नारायणं गरुड़वाहनमब्जनाभम् ग्राहाभिभूतवरवारणमुक्तिहेतुं चक्रायुधं तरुणवारिजपत्रनेत्रम् की शांति के लिए नारायण का स्मरण मैं प्रातःकाल संसार के भय और दुःखों हूँ, जो गरुड़ पर विराजमान हैं, जिनकी नाभि से कमल उत्पन्न हुआ, करता जिन्होंने गजराज को मगरमच्छ से मुक्त किया, जो चक्र धारण करते हैं और जिनके नेत्र कमल की पंखुड़ियों के समान सुंदर हैं। हरि शरणं प्रातः स्मरामि भवभीतिमहार्तिशान्त्यै नारायणं गरुड़वाहनमब्जनाभम् ग्राहाभिभूतवरवारणमुक्तिहेतुं चक्रायुधं तरुणवारिजपत्रनेत्रम् की शांति के लिए नारायण का स्मरण मैं प्रातःकाल संसार के भय और दुःखों हूँ, जो गरुड़ पर विराजमान हैं, जिनकी नाभि से कमल उत्पन्न हुआ, करता जिन्होंने गजराज को मगरमच्छ से मुक्त किया, जो चक्र धारण करते हैं और जिनके नेत्र कमल की पंखुड़ियों के समान सुंदर हैं। - ShareChat