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#jai shree ram jai shree ram jai shree ram jai shree ram jai shree ram #📙वेदों का ज्ञान #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 #🙏भगवान विष्णु की कथाएं📙
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jai shree ram - श्री रामचरितमानस बालकाण्ड ओँ जय श्री सीताराम लखि सकुच हियँ दुलहिनि अनुरूप बर परस्पर हरषहीं| मुदित सुंदरता सराहहिं सुमन सुर गन बरषहीं Il सब सुंदरीं सुंदर बरन्ह सह सब एक मंडप राजहीं | बिभुन जीव चारिउ सहित 3 जनु अवस्था बिराजहीं II४ II भावार्थः दूलह और परस्पर   अपने अपने दुलहिनें अनुरूप जोड़ी को देखकर सकुचाते हुए हृदय में हर्षित हो रही हैं। सब लोग प्रसन्न होकर उनकी सराहना करते हैं और देवगण फूल সুৎবনা ব্ী बरसा रहे हैं। सब सुंदरी दुलहिनें सुंदर के साथ दूल्हों एक ही मंडप में ऐसी शोभा पा रही हैं, मानो जीव के हृदय में चारों अवस्थाएँ (जाग्रत, स्वप्न, और सुषुप्ति अपने चारों स्वामियों (विश्व॰ तैजस तुरीय) সাহ और ब्रह्म) सहित विराजमान हों II४ II श्री रामचरितमानस बालकाण्ड ओँ जय श्री सीताराम लखि सकुच हियँ दुलहिनि अनुरूप बर परस्पर हरषहीं| मुदित सुंदरता सराहहिं सुमन सुर गन बरषहीं Il सब सुंदरीं सुंदर बरन्ह सह सब एक मंडप राजहीं | बिभुन जीव चारिउ सहित 3 जनु अवस्था बिराजहीं II४ II भावार्थः दूलह और परस्पर   अपने अपने दुलहिनें अनुरूप जोड़ी को देखकर सकुचाते हुए हृदय में हर्षित हो रही हैं। सब लोग प्रसन्न होकर उनकी सराहना करते हैं और देवगण फूल সুৎবনা ব্ী बरसा रहे हैं। सब सुंदरी दुलहिनें सुंदर के साथ दूल्हों एक ही मंडप में ऐसी शोभा पा रही हैं, मानो जीव के हृदय में चारों अवस्थाएँ (जाग्रत, स्वप्न, और सुषुप्ति अपने चारों स्वामियों (विश्व॰ तैजस तुरीय) সাহ और ब्रह्म) सहित विराजमान हों II४ II - ShareChat