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#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - अनुभूति खिलने लगीः कभी घर न टूटे, एक समझदार औरत की ज़रुरत होती है; लेकिन वो औरत भी न टूटे , तो एक समझदार आदमी की ज़रुरत होती है। अनुभूति खिलने लगीः कभी घर न टूटे, एक समझदार औरत की ज़रुरत होती है; लेकिन वो औरत भी न टूटे , तो एक समझदार आदमी की ज़रुरत होती है। - ShareChat