जय श्री सीताराम 🌹 जय हिन्दू राष्ट्र 🌹 🙏
☀️ सुन्दर काण्ड ☀️ दोहा १८☀️ पृष्ठ १९☀️
चलेउ नाइ सिरु पैठेउ बागा। फल खाएसि तरु तोरें लागा॥
रहे तहाँ बहु भट रखवारे ।
कछु मारेसि कछु जाइ पुकारे ॥१॥
वे सीताजी को सिर नवा कर चले और बाग में घुस गये। फल खाये और वृक्षों को तोड़ने लगे। वहाँ बहुत-से योद्धा रखवाले थे। उनमें से कुछ को मार डाला और कुछ ने जाकर रावण से पुकार की ॥१॥
नाथ एक आवा कपि भारी। तेहिं असोक बाटिका उजारी॥
खाएसि फलअरु बिटपउपारे।रच्छक मर्दिमर्दि महिडारे॥२॥
[और कहा-] हे नाथ! एक बड़ा भारी बंदर आया है। उसने अशोक वाटिका उजाड़ डाली। फल खाये, वृक्षों को उखाड़ डाला और रखवालों को मसल मसल कर जमीन पर डाल दिया ॥२॥
सुनि रावन पठए भट नाना।तिन्हहि देखि गर्जेउ हनुमाना॥
सब रजनीचर कपि संघारे। गए पुकारत कछुअधमारे॥३॥
यह सुन कर रावण ने बहुत-से योद्धा भेजे। उन्हें देख कर हनुमान् जी ने गर्जना की। हनुमान् जी ने सब राक्षसों को मार डाला, कुछ जो अधमरे थे, चिल्लाते हुए गये ॥३॥
पुनि पठयउ तेहिं अच्छकुमारा। चला संग लै सुभटअपारा॥
आवत देखि बिटप गहि तर्जा ।
ताहि निपाति महाधुनि गर्जा ॥४॥
फिर रावण ने अक्षयकुमार को भेजा। वह असंख्य श्रेष्ठ योद्धाओं को साथ लेकर चला। उसे आते देखकर हनुमान् जी ने एक वृक्ष [हाथ में] ले कर ललकारा और उसे मार कर महाध्वनि (बड़े जोर) से गर्जना की ॥४॥
दो०- कछु मारेसि कछु मर्देसि कछु मिलएसि धरि धूरि।
कछु पुनि जाइ पुकारे प्रभु मर्कट बल भूरि॥१८॥
उन्होंने सेना में कुछ को मार डाला और कुछ को मसल डाला और कुछ को पकड़-पकड़ कर धूल में मिला दिया। कुछ ने फिर जाकर पुकार की कि हे प्रभु! बंदर बहुत ही बलवान् है।
#सीताराम भजन


