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एक छोटे से गाँव के किनारे घने जंगल के पास एक गरीब बच्ची गौरी अपनी बूढ़ी माँ और अपनी एकमात्र गाए के साथ रहती थी। होली का पर्व पास आ रहा था, लेकिन उनके घर में न रंग था, न मिठाई। गौरी रोज अपनी गाए को जंगल में चराने ले जाती और रास्ते भर उससे बातें करती। वह मन ही मन सोचती, “काश इस बार हमारी होली भी रंगीन हो जाए।” होली की सुबह जंगल में पलाश के फूल खिले थे। लाल-नारंगी फूलों को देखकर गौरी के मन में विचार आया। उसने कुछ फूल इकट्ठा किए, उन्हें पानी में उबाला और सुंदर केसरिया रंग बना लिया। गाँव के बच्चे जब रंगों से खेल रहे थे, तब गौरी अपनी गाए के माथे पर हल्का सा रंग लगाकर बोली, “तू ही मेरी सच्ची साथी है।” यह देख गाँव की औरतों का दिल पिघल गया। सबने मिलकर गौरी को रंग और मिठाई दी। उस दिन गौरी ने समझा कि होली सिर्फ रंगों से नहीं, बल्कि प्रेम और अपनापन बाँटने से सुंदर बनती है। जंगल, गाए और गाँव के प्यार ने उसकी सूनी होली को खुशियों से भर दिया। 🌈✨ #❤️जीवन की सीख #🌞 Good Morning🌞
❤️जीवन की सीख - हली ಹ हादिकुबुधाई ऐव ஆனபஆஆபகு yashvant vishawakarma हली ಹ हादिकुबुधाई ऐव ஆனபஆஆபகு yashvant vishawakarma - ShareChat