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#ધર્મ અને અધ્યાત્મ
ધર્મ અને અધ્યાત્મ - बहुत गई थोड़ी रही, मनवा अबतो चेत। चिरैया चुग रही, कल निशदिन आयु खेत।। समय ही काल है॰ समय के बीतने के साथ शेष आयु घटती जाती है, बिचार करो जीवन का बहुत समय गुजर चुका है, अब थोड़ा समय ही बाकी है॰ इसलिए मैं कौन हूं ? यह जानने का प्रयास करो कि कहां से आया हूं ? यहां से कहां जाऊंगा ? संसार क्या है ? आदि इन सभी प्रश्नों तुम्हें आत्मज्ञान से मिल कउत्तर जाएंगे इसलिए बिना समय ब्यर्थ गंवाए आत्मज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करो। बहुत गई थोड़ी रही, मनवा अबतो चेत। चिरैया चुग रही, कल निशदिन आयु खेत।। समय ही काल है॰ समय के बीतने के साथ शेष आयु घटती जाती है, बिचार करो जीवन का बहुत समय गुजर चुका है, अब थोड़ा समय ही बाकी है॰ इसलिए मैं कौन हूं ? यह जानने का प्रयास करो कि कहां से आया हूं ? यहां से कहां जाऊंगा ? संसार क्या है ? आदि इन सभी प्रश्नों तुम्हें आत्मज्ञान से मिल कउत्तर जाएंगे इसलिए बिना समय ब्यर्थ गंवाए आत्मज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करो। - ShareChat