जब देश की विदेश नीति इतनी कमजोर हो जाए कि अपने हितों के फैसले भी किसी दूसरे देश की “इजाज़त” पर निर्भर लगने लगें, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
भारत एक संप्रभु राष्ट्र है—हमारे फैसले हमारे राष्ट्रीय हितों के आधार पर होने चाहिए, न कि किसी वैश्विक ताकत की कृपा से।
मजबूत राष्ट्र वही होता है जो आत्मसम्मान के साथ अपने आर्थिक और कूटनीतिक फैसले ले सके।
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