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कबीर ऐसी होली खेलिए, सांचा शब्द की मार ! काम क्रोध मद लोभ को, डारो हृदय निकार! #Holi2026 #santrampaljimaharaj
santrampaljimaharaj - SATUOKASHRAN Mundra खेलिए कबीर ऐसी होली सांचा शब्द की मार ! क्रोध मद लोभ को, काम डारो हृदय निकार! भावार्थ- संत रामपाल जी महाराज कबीर जी कहते हैं कि असली होली रंग खेलने से नहीं होती, बल्कि तब होती है जब मनुष्य सच्चे आध्यात्मिक ज्ञान को अपनाकर अपने भीतर के काम , क्रोध , अहंकार और लोभ जैसे विकारों को दिल से निकाल देता है। FOLLOW US ON : SATLOK ASHRAM MUNDKA OFFICIAL  SAMUNDKADELHI SADELHIMUNDKA SATUOKASHRAN Mundra खेलिए कबीर ऐसी होली सांचा शब्द की मार ! क्रोध मद लोभ को, काम डारो हृदय निकार! भावार्थ- संत रामपाल जी महाराज कबीर जी कहते हैं कि असली होली रंग खेलने से नहीं होती, बल्कि तब होती है जब मनुष्य सच्चे आध्यात्मिक ज्ञान को अपनाकर अपने भीतर के काम , क्रोध , अहंकार और लोभ जैसे विकारों को दिल से निकाल देता है। FOLLOW US ON : SATLOK ASHRAM MUNDKA OFFICIAL  SAMUNDKADELHI SADELHIMUNDKA - ShareChat