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#📖 शायरी स्टेटस
📖 शायरी स्टेटस - फिर बही बेनाम सफ़र न मंज़िल न निशाँ, उम्र भी जैसे क़दमों से क़दम मिला के चली, रुकें तो लगता है वक़्त नाराज़ हो जाएगा , मुसाफ़िर हैं साहब, राहों से फिर मोहब्बत हो चली। " फिर बही बेनाम सफ़र न मंज़िल न निशाँ, उम्र भी जैसे क़दमों से क़दम मिला के चली, रुकें तो लगता है वक़्त नाराज़ हो जाएगा , मुसाफ़िर हैं साहब, राहों से फिर मोहब्बत हो चली। " - ShareChat