इतस्ततो भषन् भूरि न पतेत् पिशुनः शुनः।
अवदाततया किं च न भेदो हंसतः सतः॥🌿
🌼अर्थात🌼
निंदा करने वाला व्यक्ति इधर-उधर कुत्ते की तरह भौंकता (बकता) रहता है। वह निंदक, हंस की तरह पवित्रता या सच्चाई को नहीं पहचान पाता। 🥀
#मेरी_पसंद_VD 🎶🎵

