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इस दृश्य को देखकर कोई भी क्रोधित हो जाएगा। एक युवती की बेरहमी से जान चली गई। उसका शरीर ज़मीन पर पड़ा है। उसकी माँ और भाई-बहन पास ही बैठे हैं, असहनीय पीड़ा से रो रहे हैं। उनका संसार एक पल में बिखर गया है। और उनके बगल में, कलम और कागज़ लिए, कुर्सी पर बैठा वह तंत्र, जिसे उसकी रक्षा करनी चाहिए थी, बस रिपोर्ट लिख रहा है। यही बात लोगों को क्रोधित करती है। एक बच्ची को सुरक्षा नहीं मिली। पाँच लोगों ने इतनी हिम्मत दिखाई कि एक जीवन को नष्ट कर दिया। इसका मतलब है कि कहीं न कहीं तंत्र विफल हुआ, कहीं न कहीं सुरक्षा विफल हुई, कहीं न कहीं सज़ा का डर उन्हें रोकने में सक्षम नहीं था। परिवार को देखिए। एक माँ जो इस दर्द को जीवन भर सहेगी। एक भाई और बहन जो जीवन भर इस दिन को याद रखेंगे। कोई रिपोर्ट, कोई दस्तावेज़, कोई फ़ाइल इसे ठीक नहीं कर सकती। जब ऐसा कुछ होता है, तो लोग तंत्र पर से विश्वास खो देते हैं। वे कठिन प्रश्न पूछते हैं, वह सुरक्षित क्यों नहीं थी? अपराधी इतने निर्भीक क्यों होते हैं? न्याय में इतना समय क्यों लगता है? ये त्रासदी बार-बार क्यों होती रहती हैं? जो समाज अपने बच्चों की रक्षा करने में असमर्थ है, उसे सच्चाई का सामना करना होगा और बदलाव लाना होगा। कानूनों को मजबूत बनाना होगा, पुलिस को त्वरित कार्रवाई करनी होगी, अदालतों को शीघ्र न्याय देना होगा और हर किसी को लड़कियों और महिलाओं के सामने आने वाले खतरे को नजरअंदाज करना बंद करना होगा। क्योंकि जब किसी बच्चे की इस तरह हत्या कर दी जाती है, तो यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं होती, बल्कि यह पूरी व्यवस्था की विफलता होती है। #satyamtiwari #shearchat
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