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#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - శరegh HaIకu हाउसवाइफ की जिंदगी सबसे चौपट जिंदगी होती है। दिन भर घर में रहना मतलब इतना एक इंसान को बीमार कर सकता है मानसिक रूप से बीमार हो जाता है इंसान। जिंदगी भर एक जैसा काम करेगी वहीं सुबह झाडू, वही पोछा, वही कपड़े धोने , वही नाश्ता, वही लंच, वही डिनर, 5 Days week नहीं 7 लिए  कोई Sunday sweek उसके Dag नहीं  बल्कि उल्टा उस दिन डबल काम। त्यौहार पर भी छुट्टी नहीं , उल्टा तब तो वो एक ' पल के लिये बैठ भी नहीं पाती। हाउसवाइफ से ज्यादा दुर्दशा दुनिया में किसी की नहीं.. | శరegh HaIకu हाउसवाइफ की जिंदगी सबसे चौपट जिंदगी होती है। दिन भर घर में रहना मतलब इतना एक इंसान को बीमार कर सकता है मानसिक रूप से बीमार हो जाता है इंसान। जिंदगी भर एक जैसा काम करेगी वहीं सुबह झाडू, वही पोछा, वही कपड़े धोने , वही नाश्ता, वही लंच, वही डिनर, 5 Days week नहीं 7 लिए  कोई Sunday sweek उसके Dag नहीं  बल्कि उल्टा उस दिन डबल काम। त्यौहार पर भी छुट्टी नहीं , उल्टा तब तो वो एक ' पल के लिये बैठ भी नहीं पाती। हाउसवाइफ से ज्यादा दुर्दशा दुनिया में किसी की नहीं.. | - ShareChat