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true - 100 / 100 "जब इंसान को हद से ज़्यादा तकलीफ़ मिल जाती है॰ तो उसके भीतर की मोहनमाया धीरे ्धीरे समाप्त हो जाती है। और जब मोह समाप्त हा जाता है॰ तो खोने का डर भी दिल से निकल जाता है। फिर चाहे वह धननदौलत हो, रिश्ते हों, वस्तुएँ हों, या फिर स्वय जीवन ही क्यों न हो - कुछ भी खोने का भय नहीं रह जाता। 21K 294 100 / 100 "जब इंसान को हद से ज़्यादा तकलीफ़ मिल जाती है॰ तो उसके भीतर की मोहनमाया धीरे ्धीरे समाप्त हो जाती है। और जब मोह समाप्त हा जाता है॰ तो खोने का डर भी दिल से निकल जाता है। फिर चाहे वह धननदौलत हो, रिश्ते हों, वस्तुएँ हों, या फिर स्वय जीवन ही क्यों न हो - कुछ भी खोने का भय नहीं रह जाता। 21K 294 - ShareChat