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"स्वर्णभूमि टाइम्स" (लुधियाना/पंजाब) 🙏🏻 #साहित्य #हिंदी साहित्य #literature
साहित्य - भूल स्वीकार की। गवान शिव [TTT हुकार T সান ব্ী तार दे रहे = क्रेय T ग़ है। 7 1 46 मजबूरी की दीवार पर, T # लिखा उम्मीद " अल्फाज़। तलाशता रहे अवसर ' a1 जाने अनजाने देकर आवाज। ़फ र की बेशक हो, कोसों दूर, जम्मेदारी स खतरे को मगर चलने को कहे हुजूर।  4 हौंसले का हाथ थाम, ीतियां सुब्हो से शाम।  देखा समझाय चल केवल बेज़ार होकर, न मिले, ना चाहिए। সীং   মন্ী छोड़कर व्यर्थ सभी गिले। बढ़ना स्वयं के बलबूते , है। ओवर- आगे, त्याग स्वप्नलोक के गोते। प्रतिबंधों का हेए। ई, सुरक्षित चमकेगा भांति दिनकर, बेबसी की आड़, गिराकर। रण संक्रमण ী মাঙন ৯ 1 बन शोला कभी शबनम, हे बंधु ! भुलाकर प्रत्येक गम। विधाओं से ান্চনা ৯ ক্ি भले डरायें भयावह साये, I दी जाए। कीनुसंधश चाहें , तेरा वक्त निकल जाये। भर हुंकार "सिंह " की तरह, कारी "गिल" बिन करे फ़ालतू जिरह। ।य की मांग केवल एक हीं नीबतिलिक नवनीत गिल बल्कि (इतिहास , राजनीति शास्त्र) , एमए dus, एम़.एड , एल.एल.बी। पोटिक्स का पूर्व प्राचार्य, सीबीएसई विद्यालय तय करेगा (उत्तर प्रदेश) | पास इलाज या नहीं। भूल स्वीकार की। गवान शिव [TTT हुकार T সান ব্ী तार दे रहे = क्रेय T ग़ है। 7 1 46 मजबूरी की दीवार पर, T # लिखा उम्मीद " अल्फाज़। तलाशता रहे अवसर ' a1 जाने अनजाने देकर आवाज। ़फ र की बेशक हो, कोसों दूर, जम्मेदारी स खतरे को मगर चलने को कहे हुजूर।  4 हौंसले का हाथ थाम, ीतियां सुब्हो से शाम।  देखा समझाय चल केवल बेज़ार होकर, न मिले, ना चाहिए। সীং   মন্ী छोड़कर व्यर्थ सभी गिले। बढ़ना स्वयं के बलबूते , है। ओवर- आगे, त्याग स्वप्नलोक के गोते। प्रतिबंधों का हेए। ई, सुरक्षित चमकेगा भांति दिनकर, बेबसी की आड़, गिराकर। रण संक्रमण ী মাঙন ৯ 1 बन शोला कभी शबनम, हे बंधु ! भुलाकर प्रत्येक गम। विधाओं से ান্চনা ৯ ক্ি भले डरायें भयावह साये, I दी जाए। कीनुसंधश चाहें , तेरा वक्त निकल जाये। भर हुंकार "सिंह " की तरह, कारी "गिल" बिन करे फ़ालतू जिरह। ।य की मांग केवल एक हीं नीबतिलिक नवनीत गिल बल्कि (इतिहास , राजनीति शास्त्र) , एमए dus, एम़.एड , एल.एल.बी। पोटिक्स का पूर्व प्राचार्य, सीबीएसई विद्यालय तय करेगा (उत्तर प्रदेश) | पास इलाज या नहीं। - ShareChat