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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ^=अलविदा माहे ऱमज़ान क़ल्ब-ए-' आशिक़ है अब पारा पारा माह-ए-रमज़ाँ رەام عادولا अल-्वदा'अ अल-्वदा'अ @೦೫ कुल्फ़त ए-्हिज्र-ओ-फुर्क़त ने मारा माह-ए-रमज़ाँ ! अल-्वदा'अ अल-्वदा'अ तेरे आने से दिल खुश हुआ था और ज़ौक़ ए- ' इबादत बढा था رەام عادولا பம் आह ! अब दिल पे है ग़म का ग़लबा माह-ए-रमज़ाँ  अल-्वदा'अ अल-्वदा'अ मस्जिदों में बहार आ गई थी जौक़ ्दर-्जौक़ आते नमाज़ी رەام عادولا பம் কী যামা ব্রম নমাড়ী ক্া তড়মা अल-्वदा'अ, अल-्वदा'अ, माह-ए-रमज़ाँ ! बज़्म ए-्इफ़्तार सजती थी कैसी खूब सहरी की रौनक़ भी होती JoLCIJyl सब समाँ हो गया सूना सूना ناضم अल-्वदा'अ, अल-्वदा'अ, माह-ए-रमज़ाँ ^=अलविदा माहे ऱमज़ान क़ल्ब-ए-' आशिक़ है अब पारा पारा माह-ए-रमज़ाँ رەام عادولا अल-्वदा'अ अल-्वदा'अ @೦೫ कुल्फ़त ए-्हिज्र-ओ-फुर्क़त ने मारा माह-ए-रमज़ाँ ! अल-्वदा'अ अल-्वदा'अ तेरे आने से दिल खुश हुआ था और ज़ौक़ ए- ' इबादत बढा था رەام عادولا பம் आह ! अब दिल पे है ग़म का ग़लबा माह-ए-रमज़ाँ  अल-्वदा'अ अल-्वदा'अ मस्जिदों में बहार आ गई थी जौक़ ्दर-्जौक़ आते नमाज़ी رەام عادولا பம் কী যামা ব্রম নমাড়ী ক্া তড়মা अल-्वदा'अ, अल-्वदा'अ, माह-ए-रमज़ाँ ! बज़्म ए-्इफ़्तार सजती थी कैसी खूब सहरी की रौनक़ भी होती JoLCIJyl सब समाँ हो गया सूना सूना ناضم अल-्वदा'अ, अल-्वदा'अ, माह-ए-रमज़ाँ - ShareChat