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प्रेम #प्रेम #ज़िंदगी प्रेम हैं
प्रेम - यदि प्रेम है तो छूना भी पवित्र है, यदि नहीं है तो देखना भी पाप है, भाव पवित्र हो तो स्पर्श भी पूजा वरना बिना प्रेम के तो है, बन जाता नज़रे मिलाना भी गुनाह है, समर्पण न हो तो स्पर्श व्यापार लगता है, और अगर प्रेम हो तो वही स्पर्श प्रार्थना बन जाता है, सम्मान नहीं, वहां देखना भी जहाँ अपराध है॰ और जहाँ प्रेम है, मौन भी संवाद है, वहां यदि प्रेम है तो छूना भी पवित्र है, यदि नहीं है तो देखना भी पाप है, भाव पवित्र हो तो स्पर्श भी पूजा वरना बिना प्रेम के तो है, बन जाता नज़रे मिलाना भी गुनाह है, समर्पण न हो तो स्पर्श व्यापार लगता है, और अगर प्रेम हो तो वही स्पर्श प्रार्थना बन जाता है, सम्मान नहीं, वहां देखना भी जहाँ अपराध है॰ और जहाँ प्रेम है, मौन भी संवाद है, वहां - ShareChat