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#स्टेट्स
स्टेट्स - है आग बस राख बाकी है बुझ चुकी मेरे भीतर अब भी वो साख बाकी है, पर लगता ये कोई पतझड़ सा मौसम है , बाकी है , ufui ఇక चुकी बस शाख है उम्मीद यही कि ये मौसम फिर बदलेगा , मेरे हक की अभी वो बैसाख बाकी है ।। है आग बस राख बाकी है बुझ चुकी मेरे भीतर अब भी वो साख बाकी है, पर लगता ये कोई पतझड़ सा मौसम है , बाकी है , ufui ఇక चुकी बस शाख है उम्मीद यही कि ये मौसम फिर बदलेगा , मेरे हक की अभी वो बैसाख बाकी है ।। - ShareChat