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तमिलनाडु के पंबन द्वीप के किनारे स्थित धनुषकोडी भारत के सबसे रहस्यमयी और ऐतिहासिक स्थानों में से एक है। इसे "भारत का अंतिम छोर" भी कहा जाता है। यहाँ धनुषकोडी के इतिहास के मुख्य पड़ाव दिए गए हैं: 1. पौराणिक महत्व (रामायण काल) धनुषकोडी का गहरा संबंध रामायण से है। माना जाता है कि: * राम सेतु का आरंभ: भगवान श्री राम ने लंका तक पहुँचने के लिए यहीं से 'राम सेतु' (नल-नील द्वारा निर्मित) का निर्माण शुरू किया था। * नाम का अर्थ: रावण पर विजय के बाद, विभीषण के अनुरोध पर श्री राम ने अपने धनुष के एक सिरे (कोडी) से सेतु को तोड़ दिया था, ताकि भविष्य में कोई इसका दुरुपयोग न कर सके। इसी कारण इस स्थान का नाम 'धनुषकोडी' पड़ा। 2. एक फलता-फूलता शहर (1964 से पहले) 20वीं सदी की शुरुआत में धनुषकोडी एक महत्वपूर्ण व्यापारिक और पर्यटन केंद्र था: * यहाँ एक बड़ा रेलवे स्टेशन, अस्पताल, स्कूल, पोस्ट ऑफिस और सीमा शुल्क (Customs) कार्यालय था। * भारत और श्रीलंका (तब सीलोन) के बीच व्यापार और यात्रियों के लिए 'बोट मेल' ट्रेन चलती थी। लोग यहाँ से जहाज पकड़कर सीधे कोलंबो जाते थे। 3. 1964 का चक्रवात: "द घोस्ट टाउन" 22 दिसंबर, 1964 की रात धनुषकोडी के इतिहास का सबसे काला पन्ना साबित हुई: * एक भीषण समुद्री चक्रवात (Cyclone) ने पूरे शहर को अपनी चपेट में ले लिया। * रेल दुर्घटना: पंबन से धनुषकोडी आ रही एक पैसेंजर ट्रेन लहरों में बह गई, जिससे उसमें सवार सभी 115 यात्रियों की मृत्यु हो गई। * इस आपदा में पूरा शहर मलबे में तब्दील हो गया और करीब 1,800 लोग मारे गए। इसके बाद सरकार ने इस जगह को 'रहने के लिए अनुपयुक्त' (Ghost Town) घोषित कर दिया। वर्तमान स्थिति आज धनुषकोडी एक प्रमुख पर्यटन स्थल है जहाँ लोग इतिहास के अवशेष देखने आते हैं। * खंडहर: यहाँ आज भी उस समय के चर्च, रेलवे स्टेशन और घरों के खंडहर देखे जा सकते हैं, जो समय के साथ समुद्र की रेत में समा गए हैं। * संगम: यहाँ एक ओर बंगाल की खाड़ी (शांत पानी) और दूसरी ओर अरब सागर (उग्र लहरें) का मिलन होता है, जिसे 'अरिकुनाई' कहा जाता है। * सड़क मार्ग: अब सरकार ने यहाँ तक एक बेहतरीन पक्की सड़क बना दी है, जिससे यात्रियों के लिए यहाँ पहुँचना आसान हो गया है। #इतिहास
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