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आज रास्ते में एक पिता अपने बेटे को सायकल सिखा रहे थे… हाथ सीट के पीछे था, पर भरोसा आँखों में। वो बच्चा सायकल नहीं सीख रहा था, वो गिरने से पहले पिता जी पर भरोसा करना सीख रहा था। ये देख कर मेरा बचपन बिना दस्तक दिए सामने आ खड़ा हुआ… ​मुझे याद आया, जब मैं पहली बार साइकिल चलाना सीख रहा था। पापा पीछे से कैरियर पकड़कर दौड़ रहे थे। मैं डर रहा था कि कहीं वो छोड़ न दें, और उन्होंने छोड़ भी दिया... मैं गिरा, घुटने पर चोट लगी। मैं रोते हुए मुड़ा और उनसे कहा पापा आपने हाथ क्यों छोड़ा?' ​पापा मुस्कुराए और पास आकर बोले 'बेटा, हाथ पकड़कर तो मैं तुझे ताउम्र चला सकता था, पर मैंने हाथ इसलिए छोड़ा ताकि तू खुद हौसला पकड़कर खड़ा होना सीख सके।' ​आज समझ आता है कि पिता कभी हमें गिरते हुए देखना नहीं चाहते, वो बस हमें इतना मजबूत बनाना चाहते हैं कि जब वो साथ न हों, तब भी हम दुनिया के किसी भी शिखर पर हम अकेले खड़े हो सकें। # #मेरी डायरी
मेरी डायरी - बेटा , हाथ पकड़कर तो मैं तुझे उम्रभर चला सकता था, लेकिन हाथ इसलिए छोड़़ा ताकि तू अपना हौसला पकड़ना सीख सके। बेटा , हाथ पकड़कर तो मैं तुझे उम्रभर चला सकता था, लेकिन हाथ इसलिए छोड़़ा ताकि तू अपना हौसला पकड़ना सीख सके। - ShareChat