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##Jharkhand - २०-२५ मासूम बच्चों के सामने जब मौत मंडरा रही थी, तब एक 'माँ' दीवार बनकर खड़ी हो गई नीमच की कंचन बाई मेघवाल एक नाम नहीं , बल्कि ममता , साहस और बलिदान की ಲಕ   अमर मिसाल। आंगनवाड़ी के २० मासूम बच्चों पर मधुमक्खियों ने जब अचानक हमला किया, तो कंचन जी ने पल भर भी नहीं सोचा। उन्होंने बच्चों को बचाने के लिए खुद को डंकों के सामने खडा कर हजारों डंक झेले अपनी जान कुर्बान कर दी लेकिन २० घरों दिया। नहीं दिए। के चिराग 1 बुझने " आज कंचन बाई हमारे बीच नहीं हैं , लेकिन उनका यह त्याग इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा| दर्दनाक सच्चाई यह है कि और तीन मासूम बच्चे रह गए हैं। अब उनके पीछे लकवाग्रस्त पति यह जिम्मेदारी सरकार और समाज की है २०-२५ मासूम बच्चों के सामने जब मौत मंडरा रही थी, तब एक 'माँ' दीवार बनकर खड़ी हो गई नीमच की कंचन बाई मेघवाल एक नाम नहीं , बल्कि ममता , साहस और बलिदान की ಲಕ   अमर मिसाल। आंगनवाड़ी के २० मासूम बच्चों पर मधुमक्खियों ने जब अचानक हमला किया, तो कंचन जी ने पल भर भी नहीं सोचा। उन्होंने बच्चों को बचाने के लिए खुद को डंकों के सामने खडा कर हजारों डंक झेले अपनी जान कुर्बान कर दी लेकिन २० घरों दिया। नहीं दिए। के चिराग 1 बुझने " आज कंचन बाई हमारे बीच नहीं हैं , लेकिन उनका यह त्याग इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा| दर्दनाक सच्चाई यह है कि और तीन मासूम बच्चे रह गए हैं। अब उनके पीछे लकवाग्रस्त पति यह जिम्मेदारी सरकार और समाज की है - ShareChat