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#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - तेरी मेरी समझ अलग है,नजरिया अलग है,काम अलग है अंदाज भी अलग है! मगर परेशानियां एक हैं जरूरतें एक हैं, भावनाएं एक हैं मंजिलें एक हैं और मालिक भी एक ही है! फिर तू खुद को अलग क्यूँ मानता है? हमारे सिर्फ मुझ से जिस्म अलग है,जज्बात तो एक ही है! तेरी मेरी समझ अलग है,नजरिया अलग है,काम अलग है अंदाज भी अलग है! मगर परेशानियां एक हैं जरूरतें एक हैं, भावनाएं एक हैं मंजिलें एक हैं और मालिक भी एक ही है! फिर तू खुद को अलग क्यूँ मानता है? हमारे सिर्फ मुझ से जिस्म अलग है,जज्बात तो एक ही है! - ShareChat