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#shri man narayan narayan hari hari #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
shri man narayan narayan hari hari - 9:16 ও Vu ll ull |89% एक ओर धूप दीप की सुगंध  थाप और नाम- ஈகி संकीर्तन' की गूंज है, तो दूसरी ओर शराब की दुर्गंध, गाली- गलौज और हुड़दंग का शोर। आज की होली इन दो विपरीत  भूल गए हैं कि जिसे हम  दिशाओं के बीच खड़ी है। क्या हम आज केवल रंगों और नशे का खेल समझ रहे हैं, वह वास्तव में एक 'मांगलिक भक्त उत्सव' है? भारतीय संस्कृति के अनुसार, होली का पर्व आत्म विस्मृति का नहीं, बल्कि भगवद् प्रेम की स्मृति का पर्व है। हमें यह तय करना होगा कि हम इस पावन दिवस पर अपनी चेतना को ऊपर उठा रहे हैं या उसे राक्षसी' प्रवृत्तियों में गिरा रहे हैं। २. पहचान का चुनावः शप्रह्लाद-पक्ष॰ या हिरण्यकश्यप - पक्ष१? आज की होली दो श्रेणियों में विभाजित है। यह केवल उत्सव मनाने का तरीका नहीं, बल्कि आपकी पहचान (Identity) प्रमाण हैः का प्रह्लाद पक्ष ( भक्तों की होली): इसमें सात्विक आनंद जैसे शुद्ध है। यहाँ गुझिया , रबड़ी और रसगुल्ला   प्रभु को भोग लगाकर पाना है। भक्त परस्पर পনাথী ক্ধা प्रेम से मिलते हैं, बड़ों के चरण छूते हैं और पद गायन करते हुए नाम संकीर्तन में डूबते हैं। यह ' मंगल' का प्रतीक है। (दुष्टों की होली): यह  आसुरी'  हिरण्यकश्यप-पक्ष शराब पीकर नाली में गिरना, (Demonic) व्यवहार है गाली गलौज करना, चेहरे पर कोयला या नाली दूसरों : की कीचड़ मलना - यह सब राक्षसी प्रवृत्ति है। 9:16 ও Vu ll ull |89% एक ओर धूप दीप की सुगंध  थाप और नाम- ஈகி संकीर्तन' की गूंज है, तो दूसरी ओर शराब की दुर्गंध, गाली- गलौज और हुड़दंग का शोर। आज की होली इन दो विपरीत  भूल गए हैं कि जिसे हम  दिशाओं के बीच खड़ी है। क्या हम आज केवल रंगों और नशे का खेल समझ रहे हैं, वह वास्तव में एक 'मांगलिक भक्त उत्सव' है? भारतीय संस्कृति के अनुसार, होली का पर्व आत्म विस्मृति का नहीं, बल्कि भगवद् प्रेम की स्मृति का पर्व है। हमें यह तय करना होगा कि हम इस पावन दिवस पर अपनी चेतना को ऊपर उठा रहे हैं या उसे राक्षसी' प्रवृत्तियों में गिरा रहे हैं। २. पहचान का चुनावः शप्रह्लाद-पक्ष॰ या हिरण्यकश्यप - पक्ष१? आज की होली दो श्रेणियों में विभाजित है। यह केवल उत्सव मनाने का तरीका नहीं, बल्कि आपकी पहचान (Identity) प्रमाण हैः का प्रह्लाद पक्ष ( भक्तों की होली): इसमें सात्विक आनंद जैसे शुद्ध है। यहाँ गुझिया , रबड़ी और रसगुल्ला   प्रभु को भोग लगाकर पाना है। भक्त परस्पर পনাথী ক্ধা प्रेम से मिलते हैं, बड़ों के चरण छूते हैं और पद गायन करते हुए नाम संकीर्तन में डूबते हैं। यह ' मंगल' का प्रतीक है। (दुष्टों की होली): यह  आसुरी'  हिरण्यकश्यप-पक्ष शराब पीकर नाली में गिरना, (Demonic) व्यवहार है गाली गलौज करना, चेहरे पर कोयला या नाली दूसरों : की कीचड़ मलना - यह सब राक्षसी प्रवृत्ति है। - ShareChat