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#मन की बात
मन की बात - दिल करता है तुम्हें गले के रो लूँ, लगाकर जी भर ताकि कह सकूँ कि तुमसे दूर रहना कितना भारी पडता है। कमी दिल R हर पल को चुपचाप काटती रहती है, साँसें चलती हैं मगर ज़िंदगी लगती है। अधूरी काश तुम समझ पाते, ये मुझे रोज़ थोड़ा-्थोड़़ा दूरियाँ तोड़ देती हैं। दिल करता है तुम्हें गले के रो लूँ, लगाकर जी भर ताकि कह सकूँ कि तुमसे दूर रहना कितना भारी पडता है। कमी दिल R हर पल को चुपचाप काटती रहती है, साँसें चलती हैं मगर ज़िंदगी लगती है। अधूरी काश तुम समझ पाते, ये मुझे रोज़ थोड़ा-्थोड़़ा दूरियाँ तोड़ देती हैं। - ShareChat