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#hoil 2 मार्च की रात्रि में जलेगी होलिका, धुरेड़ी 4 को.?
hoil - २ मार्च की रात्रि में जलेगी होलिका, धुरेड़ी 4 को रंग पर्वः २३ फरवरी से प्रारंभ होंगे होलाष्टक , शुभ कार्यों पर लगेगा ब्रेक तीन घंटे २८ मिनट रहेगा ग्रहण ज्येतिषचार्य के अनुसार 3 मर्च को खग्रास  चंद्रगहण लगेगा. यह गहण गर्त उदितखड चंद्रग्रहण के रूप मे भी दृश्य होगा क्योकि चद्रोदय के समय केयल डसका सेशष दृश्य होगा।  भारत के अलावा यह गरहण पूर्वी यूरोप , एशिया महाद्वीप, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका  भासस जवलपर दकषिणी अमेरिका, पेसिफिक अटार्कटिका आदि 8ेत्रों में दृश्य होगा। आचार्य पं होली से आठ दिन पहले होलाष्टक लग जाते है। इस बार २३ फरवरी वसुदेव शस्त्री एव प॰ राजकुमार शर्मा शास्त्री के अनुसार भारतीय समयानुसार खंड  से होलाष्टक प्रारंभ होँगे। इन दिनों में कोई भी शुभ कार्य नरहीं किया  चंद्रग्रहण का परंभ ३ १९ बजे होगा तथा ग्हण क मेक्ष शाम ६ ४५ बजे होगा। 3 सार्च को सूर्यास्त शम ५४८ बजे हो रहा है॰ लग्भग 1 घंटे तक यह ग्रहण दिखाई देगा।  जाता हे। मान्यता ह कि इन आठ दिन ग्रह अपना स्थान बदलते हें इसलिए कोई भी मांगलिक कार्य नहो किया जाता है। होलिका दहन खंड चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे २८ मिनट की हे। गहण का मध्यकाल शम  २ मार्च सोमवार को किया जाएगा। होलिका दहन का मुहूर्त मध्यरात ०४ बजे रहेगा। इसका सूतक 3 मर्च को पातः ९४० से परंभ होगा। ग्रहण काल मे के बाद 5 बजे से 3 मार्च के सूर्योदय के पूर्व रहेगा। दरअसल शाम  होली का पर्व नही मनाया जाता एवं पूर्णिमा तिथि पर भी धुरेड़ी नही मनाई  18, 58 जती ५३२६ बजे से मध्यरात ४ ५९ बजे तक भद्रा योग रहेगा। इस कारण से 4 मार्च के धुरेडी मनाई जाएगी। नगर पंडित सभा के अ्यक्ष पं. रमेर दुबेने কালস होलिका दहन नहीं किया जाता ह। 4 मार्च को मनाई जाएगी। बताया कि 2 सर्च को हेलिका दहन होगा एवं 4 मर्च कोहोल खेली  ತ' অবঠী]  पं॰ रोहित दुबे के अनुसार फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलाष्टक মহৃব तरह करने चाहिए उपाय होलाष्टक मनाया जाता है। होलाष्टक के आठ दिनों में नकारात्मक ऊर्जा बहुत बढ जाती है॰ इसलिए शुभ कार्य नर्ही होते हें। धुरेड़ी - पं॰ सौरभ  वेदिक विद्वानों के अनुसार चिंताओं एव समस्याओं से मुक्ति पाने के লিব গ্ন इसलिए 4 को रहेगी अनुसार 2 मार्च दिनो दुबे के चतुर्दशी तिथि का समापन शाम ५२५ बजे पर होगा और " मे विष्णु जी के साथन साथ नृसिंह स्तोत्र का पठ करना चाहिए। इसी प्रकार अफ्े করা | चाहिर।  मे पूज  पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को शाम ४३३० बजे तक रहेगी। पूर्णिमा तिथि सामग्री अर्फित करनी आराध्यदेव के चरणों सूर्यके करण कोई  फूल और कुमकुम अर्पित करे। चंद्रम के लिए समस्या आ रही होतो सूर्यको जिस दिन रात्रिरमें प्राप्त होती हैं॰ उस दिन होलिका दहन किया  लल जाता है, इस बार 2 मार्च को पूर्णिमा तिथि रात्रि में प्राप्त होगी  अबीर, मंगल के लिए लल चंदन. बुध के लिए हरे फल एव मेहदी, बृहस्पति के लिए परतु भद्रा का साया शाम ५२६ से अंतरात्रि ४५१ बजे तक रहने केसर हल्दी युक्त दूय॰ शुक्र ग्रह की शति के लिए सफेद चंदन  माखन ओर मिश्री के कारण भद्रा के उपरांत होलिका दहन किया जाएगा। शनिके लिएकाले तिल. राहन्केतुके लिर पंचगव्य अर्पित कर।  २ मार्च की रात्रि में जलेगी होलिका, धुरेड़ी 4 को रंग पर्वः २३ फरवरी से प्रारंभ होंगे होलाष्टक , शुभ कार्यों पर लगेगा ब्रेक तीन घंटे २८ मिनट रहेगा ग्रहण ज्येतिषचार्य के अनुसार 3 मर्च को खग्रास  चंद्रगहण लगेगा. यह गहण गर्त उदितखड चंद्रग्रहण के रूप मे भी दृश्य होगा क्योकि चद्रोदय के समय केयल डसका सेशष दृश्य होगा।  भारत के अलावा यह गरहण पूर्वी यूरोप , एशिया महाद्वीप, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका  भासस जवलपर दकषिणी अमेरिका, पेसिफिक अटार्कटिका आदि 8ेत्रों में दृश्य होगा। आचार्य पं होली से आठ दिन पहले होलाष्टक लग जाते है। इस बार २३ फरवरी वसुदेव शस्त्री एव प॰ राजकुमार शर्मा शास्त्री के अनुसार भारतीय समयानुसार खंड  से होलाष्टक प्रारंभ होँगे। इन दिनों में कोई भी शुभ कार्य नरहीं किया  चंद्रग्रहण का परंभ ३ १९ बजे होगा तथा ग्हण क मेक्ष शाम ६ ४५ बजे होगा। 3 सार्च को सूर्यास्त शम ५४८ बजे हो रहा है॰ लग्भग 1 घंटे तक यह ग्रहण दिखाई देगा।  जाता हे। मान्यता ह कि इन आठ दिन ग्रह अपना स्थान बदलते हें इसलिए कोई भी मांगलिक कार्य नहो किया जाता है। होलिका दहन खंड चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे २८ मिनट की हे। गहण का मध्यकाल शम  २ मार्च सोमवार को किया जाएगा। होलिका दहन का मुहूर्त मध्यरात ०४ बजे रहेगा। इसका सूतक 3 मर्च को पातः ९४० से परंभ होगा। ग्रहण काल मे के बाद 5 बजे से 3 मार्च के सूर्योदय के पूर्व रहेगा। दरअसल शाम  होली का पर्व नही मनाया जाता एवं पूर्णिमा तिथि पर भी धुरेड़ी नही मनाई  18, 58 जती ५३२६ बजे से मध्यरात ४ ५९ बजे तक भद्रा योग रहेगा। इस कारण से 4 मार्च के धुरेडी मनाई जाएगी। नगर पंडित सभा के अ्यक्ष पं. रमेर दुबेने কালস होलिका दहन नहीं किया जाता ह। 4 मार्च को मनाई जाएगी। बताया कि 2 सर्च को हेलिका दहन होगा एवं 4 मर्च कोहोल खेली  ತ' অবঠী]  पं॰ रोहित दुबे के अनुसार फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलाष्टक মহৃব तरह करने चाहिए उपाय होलाष्टक मनाया जाता है। होलाष्टक के आठ दिनों में नकारात्मक ऊर्जा बहुत बढ जाती है॰ इसलिए शुभ कार्य नर्ही होते हें। धुरेड़ी - पं॰ सौरभ  वेदिक विद्वानों के अनुसार चिंताओं एव समस्याओं से मुक्ति पाने के লিব গ্ন इसलिए 4 को रहेगी अनुसार 2 मार्च दिनो दुबे के चतुर्दशी तिथि का समापन शाम ५२५ बजे पर होगा और " मे विष्णु जी के साथन साथ नृसिंह स्तोत्र का पठ करना चाहिए। इसी प्रकार अफ्े করা | चाहिर।  मे पूज  पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को शाम ४३३० बजे तक रहेगी। पूर्णिमा तिथि सामग्री अर्फित करनी आराध्यदेव के चरणों सूर्यके करण कोई  फूल और कुमकुम अर्पित करे। चंद्रम के लिए समस्या आ रही होतो सूर्यको जिस दिन रात्रिरमें प्राप्त होती हैं॰ उस दिन होलिका दहन किया  लल जाता है, इस बार 2 मार्च को पूर्णिमा तिथि रात्रि में प्राप्त होगी  अबीर, मंगल के लिए लल चंदन. बुध के लिए हरे फल एव मेहदी, बृहस्पति के लिए परतु भद्रा का साया शाम ५२६ से अंतरात्रि ४५१ बजे तक रहने केसर हल्दी युक्त दूय॰ शुक्र ग्रह की शति के लिए सफेद चंदन  माखन ओर मिश्री के कारण भद्रा के उपरांत होलिका दहन किया जाएगा। शनिके लिएकाले तिल. राहन्केतुके लिर पंचगव्य अर्पित कर। - ShareChat