ShareChat
click to see wallet page
search
#भगवत गीता #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓
भगवत गीता - क्लेशोडधिकतरस्तेषामव्यक्तासक्तचेतसाम्। अव्यक्ता हि गतिर्दुःखं देहवद्रिखाप्यते। उन सच्चिदानन्दघन निराकार ब्रह्म मे आसक्त चित्तवाले पुरुषों के साधनमे परिश्रमाविशषहैक्याकिदिहभिमानिया द्वॅाय अव्यक्तविषयक जतिदुख़खपूरवक प्रप्तकोजताह 5  व्याख्यः इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण भक्तियोग की कठिनाई और उसके लाभकेबारेमे बात कर रहेह।चे कहतेहै किजोलोग अनिश्चित और अव्यक्त अस्पष्ट ब्रह्मको ध्यान मेखकर भक्ति करते है उनकेलिप््यहमर्गअधिक कठिनहता है यहाँ परअव्यक्तारसे तात्प्यहकिनिरकार अदृश्य और अपार ब्रह्मका पकड़ना और समझना बहत कठिन है। எக के कारण जाो भक्त एसे ब्रह्मको ध्यान में रखते हैं క भक्ति का मार्ग बहत ही क्लेशपूर्ण और दुःखदाईह सकताहयहकठिनाई इसलिपहितीहैक्योंकि उनॅकेमनकी चंचलता औरशरीरकीसीमाएँ इस ब्रह्मक अनन्त और अदृश्य स्वरूपकोस्वीकार करनेमेबाधा डालतीहै[ इस श्लोक स यह भास्पष्हतहकि जब भक्ति कॉा मार्ग स्पष्ट और साकार रूप मे हा, जैसकि भगवान की एक निश्चित पूजा या उनकीलीलाओं का ध्यान तायह कठिनाई कम होजाती ह। भगवान श्रीकृष्ण इस श्लोक के माध्यम से यह संकेत इसप्रकार देतेहैकिनिराकार ब्रह्मकी भक्ति कठिन हो सकतीहै और इसके लिपविशेष प्रयास और धै्यकी आवश्यकता हतीहै क्लेशोडधिकतरस्तेषामव्यक्तासक्तचेतसाम्। अव्यक्ता हि गतिर्दुःखं देहवद्रिखाप्यते। उन सच्चिदानन्दघन निराकार ब्रह्म मे आसक्त चित्तवाले पुरुषों के साधनमे परिश्रमाविशषहैक्याकिदिहभिमानिया द्वॅाय अव्यक्तविषयक जतिदुख़खपूरवक प्रप्तकोजताह 5  व्याख्यः इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण भक्तियोग की कठिनाई और उसके लाभकेबारेमे बात कर रहेह।चे कहतेहै किजोलोग अनिश्चित और अव्यक्त अस्पष्ट ब्रह्मको ध्यान मेखकर भक्ति करते है उनकेलिप््यहमर्गअधिक कठिनहता है यहाँ परअव्यक्तारसे तात्प्यहकिनिरकार अदृश्य और अपार ब्रह्मका पकड़ना और समझना बहत कठिन है। எக के कारण जाो भक्त एसे ब्रह्मको ध्यान में रखते हैं క भक्ति का मार्ग बहत ही क्लेशपूर्ण और दुःखदाईह सकताहयहकठिनाई इसलिपहितीहैक्योंकि उनॅकेमनकी चंचलता औरशरीरकीसीमाएँ इस ब्रह्मक अनन्त और अदृश्य स्वरूपकोस्वीकार करनेमेबाधा डालतीहै[ इस श्लोक स यह भास्पष्हतहकि जब भक्ति कॉा मार्ग स्पष्ट और साकार रूप मे हा, जैसकि भगवान की एक निश्चित पूजा या उनकीलीलाओं का ध्यान तायह कठिनाई कम होजाती ह। भगवान श्रीकृष्ण इस श्लोक के माध्यम से यह संकेत इसप्रकार देतेहैकिनिराकार ब्रह्मकी भक्ति कठिन हो सकतीहै और इसके लिपविशेष प्रयास और धै्यकी आवश्यकता हतीहै - ShareChat