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#🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇
🕉️सनातन धर्म🚩 - हरि शरणं बिनु भव न तरिअ उरगारि सेवक सेब्य भाव भजहु राम पद पंकज अस सिद्धांत बिचारि काकभूसूंडी जी कहते है कि॰हे सर्पों के शत्रु गरुड़जी! मैं सेवक हूँ और भगवान् मेरे सेव्य (स्वामी) हैं॰ इस भाव के बिना संसार रूपी से तरना नहीं हो सकता। ऐसा सिद्धांत विचारकर श्री रामचंद्रजी के चरण कमलों का कीजिए भजन मानस, उत्तरकाण्ड ११९को हरि शरणं बिनु भव न तरिअ उरगारि सेवक सेब्य भाव भजहु राम पद पंकज अस सिद्धांत बिचारि काकभूसूंडी जी कहते है कि॰हे सर्पों के शत्रु गरुड़जी! मैं सेवक हूँ और भगवान् मेरे सेव्य (स्वामी) हैं॰ इस भाव के बिना संसार रूपी से तरना नहीं हो सकता। ऐसा सिद्धांत विचारकर श्री रामचंद्रजी के चरण कमलों का कीजिए भजन मानस, उत्तरकाण्ड ११९को - ShareChat