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#✝यीशु वचन
✝यीशु वचन - २० जनवरी *क्रोधित तो करो , पर पाप मत करो... ' সতন মভিনা 4:4 क्रोध अपने आप में समस्या नहीं है। यह अन्याय, और गलत कामों बुराई के प्रति मनुष्य की एक परमेश्वर प्रदत्त प्रतिक्रिया है। समस्या तब शुरू होती है जब क्रोध को बिना नियंत्रण के छोड़ दिया जाता है। बेलगाम क्रोध जल्दी ही पाप में बदल जाता है्हमारे शब्दों को बिगाड़ देता है॰ हमारे उद्देश्यों को ज़हरीला बना देता है और हमारे दिलों को कठोर कर देता है। दाऊद हमें क्रोध को दबाने के लिए नहीं , बल्कि आत्म-परीक्षा के द्वारा उसे परमेश्वर के अधीन करने के लिए प्रेरित करता है। दिन समाप्त होने से पहले रुककर सोचिए। क्या आपका क्रोध घायल अहंकार या स्वार्थी महत्वाकांक्षा से पैदा हुआ था? तब पश्चाताप की आवश्यकता है। क्या आपका क्रोध कठोर बातों या अनुचित कामों में बदल गया? बिना बहाना बनाए उसे स्वीकार कीजिए। लेकिन यदि आपका क्रोध किसी वास्तविक अन्याय के कारण था, तो बदला न लें। उसे प्रभु के सामने रखिए और उसके न्याय की प्रतीक्षा कीजिए। अनसुलझा क्रोध कड़वाहट लोगों दोनों से दूर कर में बदल जाता है, और कड़वाहट हमें परमेश्वर और  देती है। शास्त्र सा़फ़ कहता हैः मनुष्य का क्रोध कभी भी परमेश्वर की धार्मिकता उत्पन्न नहीं करता (याकूब १:२०)| केवल समर्पित हृदय ही ऐसा सकते हैं। कर सिर्फ एक आवाज- Hindi २० जनवरी *क्रोधित तो करो , पर पाप मत करो... ' সতন মভিনা 4:4 क्रोध अपने आप में समस्या नहीं है। यह अन्याय, और गलत कामों बुराई के प्रति मनुष्य की एक परमेश्वर प्रदत्त प्रतिक्रिया है। समस्या तब शुरू होती है जब क्रोध को बिना नियंत्रण के छोड़ दिया जाता है। बेलगाम क्रोध जल्दी ही पाप में बदल जाता है्हमारे शब्दों को बिगाड़ देता है॰ हमारे उद्देश्यों को ज़हरीला बना देता है और हमारे दिलों को कठोर कर देता है। दाऊद हमें क्रोध को दबाने के लिए नहीं , बल्कि आत्म-परीक्षा के द्वारा उसे परमेश्वर के अधीन करने के लिए प्रेरित करता है। दिन समाप्त होने से पहले रुककर सोचिए। क्या आपका क्रोध घायल अहंकार या स्वार्थी महत्वाकांक्षा से पैदा हुआ था? तब पश्चाताप की आवश्यकता है। क्या आपका क्रोध कठोर बातों या अनुचित कामों में बदल गया? बिना बहाना बनाए उसे स्वीकार कीजिए। लेकिन यदि आपका क्रोध किसी वास्तविक अन्याय के कारण था, तो बदला न लें। उसे प्रभु के सामने रखिए और उसके न्याय की प्रतीक्षा कीजिए। अनसुलझा क्रोध कड़वाहट लोगों दोनों से दूर कर में बदल जाता है, और कड़वाहट हमें परमेश्वर और  देती है। शास्त्र सा़फ़ कहता हैः मनुष्य का क्रोध कभी भी परमेश्वर की धार्मिकता उत्पन्न नहीं करता (याकूब १:२०)| केवल समर्पित हृदय ही ऐसा सकते हैं। कर सिर्फ एक आवाज- Hindi - ShareChat