ShareChat
click to see wallet page
search
#⭕#true line #True line #
⭕true line💯 - राम जो संसार जीतने की ताकत रखता था क्या समाज की उंगलियां तोड़ नहीं सकता था.. ! समाज तब तक उंगली नहीं उठाता जब तक स्त्री के सम्मान की रक्षा पति करता है। ये कोई मर्यादा नहीं होती कि समाज ने बोला तो अग्निपरीक्षा दो समाज के लिए। यदि अग्नि परीक्षा सीता की हुई तो राम की क्यों नहीं। ೫ T೯ पितृसत्तात्मक सोच थी जो सीता ये केवल वापसी के बाद भी वनवास ही मिला। एक गर्भवती स्त्री को फिर से महल से बाहर अपने बच्चों की अकेली जिम्मेदारी मिली। समाज कोई और नहीं होता हम सब समाज का निर्माण करते हैं। चार लोगों ने बोलना ही है इसीलिए चार लोगों की या तो परवाह न मुंहतोड़ जवाब दो। अन्यथा एक करो या फिर उनका पतिव्रता स्त्री एक पवित्र नारी हमेशा ही अग्निपरीक्षा देती रहेगी। राम जो संसार जीतने की ताकत रखता था क्या समाज की उंगलियां तोड़ नहीं सकता था.. ! समाज तब तक उंगली नहीं उठाता जब तक स्त्री के सम्मान की रक्षा पति करता है। ये कोई मर्यादा नहीं होती कि समाज ने बोला तो अग्निपरीक्षा दो समाज के लिए। यदि अग्नि परीक्षा सीता की हुई तो राम की क्यों नहीं। ೫ T೯ पितृसत्तात्मक सोच थी जो सीता ये केवल वापसी के बाद भी वनवास ही मिला। एक गर्भवती स्त्री को फिर से महल से बाहर अपने बच्चों की अकेली जिम्मेदारी मिली। समाज कोई और नहीं होता हम सब समाज का निर्माण करते हैं। चार लोगों ने बोलना ही है इसीलिए चार लोगों की या तो परवाह न मुंहतोड़ जवाब दो। अन्यथा एक करो या फिर उनका पतिव्रता स्त्री एक पवित्र नारी हमेशा ही अग्निपरीक्षा देती रहेगी। - ShareChat