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#☝अनमोल ज्ञान ♥️अष्टलक्ष्मी स्तोत्र ♥️
☝अनमोल ज्ञान - श्री अष्टलक्ष्मि स्तोत्र [Sri astalakshmi stotra] सुमनसवँदित  माधवि चँद्रसहोदरि हेममये। सुँदरि मुनिगण मँडित मोक्षप्रदायिनि मँजुळ  भाषिणि वेदनुते।। पँकज वासिनि देवसुपूजित सद्गुणवर्शिणि शाँतियुते। मधुसूदनकामिनि आदिलक्ष्मी सदा पालयमाँ। । जय जय हे अयिकलिकल्मषनाशिनि कामिनि वैदिकरूपिणि वेदमये। क्षीर समुद्भव मँगळरूपिणि मँत्र निवासिनि मँत्रनुते।। मँगळदायिनि अँबुजवासिनि देवगणाश्रित पादयुते। मधुसूदनकामिनि धान्यलक्ष्मी सदा पालयमाँ।। जय जय हे जयवरवर्णिनि वैष्णवि भार्गवि मंत्र स्वरूपिणि मँत्रमये। सुरगण पूजित शीघ्रफलप्रद ज्ञानविकासिनि शास्त्रनुते।। भवभयहारिणि पाप विमोचनि साधु जनाश्रित पादयुते मधुसूदनकामिनि धैर्यलक्ष्मी सदा पालयमाँ। । जय जय हे नाशिनि कामिनि सर्वफलप्रद शास्त्रमये। दुर्गति जयजय रथगजसुरगपदाति समावृत परिजन मँडित लोकसुते।। हरिहर ब्रह्मसुपूजित सेवित तापनिवारिणि पादयुते । मधुसूदनकामिनि गजलक्ष्मीरूपेण सदा पालयमाँ।। जय जय हे अयिखगवाहिनि मोहिनि चक्रिणि रागविवर्धिनि ज्ञानमये। गुणगण वारिधि लोकहितैषिणि स्वरसप्त भूषित गाननुते।। सकल सुरासुरु देव मुनीश्वर मानव वँदित पादयुते। मधुसूदनकामिनि सँतानलक्ष्मी सदा पालयमाँ। । जय जिय हे सद्गुणदायिनि ज्ञान विकासिनि ज्ञानमये। जयजय कमलासनि अनुदिनमर्चित कुँकुमधूसर भूषित वासित वाद्यनुते।।  कनकधारास्तुति वैभव वँदित शँकर देशिक मान्यपदे। मधुसूदनकामिनि विजयलक्ष्मी सदा पालयमाँ ।। जय जय हे सुरेश्वरि भारति भार्गवि शोकविनाशिनि रत्नमये। प्रणत ক্রতনিগুণতা शाँति समावृत हास्यमुखे।। मणिमय भूषित नवनिधि टायिनि कलिमलहारिणि कामित फलप्रद हस्तयते श्री अष्टलक्ष्मि स्तोत्र [Sri astalakshmi stotra] सुमनसवँदित  माधवि चँद्रसहोदरि हेममये। सुँदरि मुनिगण मँडित मोक्षप्रदायिनि मँजुळ  भाषिणि वेदनुते।। पँकज वासिनि देवसुपूजित सद्गुणवर्शिणि शाँतियुते। मधुसूदनकामिनि आदिलक्ष्मी सदा पालयमाँ। । जय जय हे अयिकलिकल्मषनाशिनि कामिनि वैदिकरूपिणि वेदमये। क्षीर समुद्भव मँगळरूपिणि मँत्र निवासिनि मँत्रनुते।। मँगळदायिनि अँबुजवासिनि देवगणाश्रित पादयुते। मधुसूदनकामिनि धान्यलक्ष्मी सदा पालयमाँ।। जय जय हे जयवरवर्णिनि वैष्णवि भार्गवि मंत्र स्वरूपिणि मँत्रमये। सुरगण पूजित शीघ्रफलप्रद ज्ञानविकासिनि शास्त्रनुते।। भवभयहारिणि पाप विमोचनि साधु जनाश्रित पादयुते मधुसूदनकामिनि धैर्यलक्ष्मी सदा पालयमाँ। । जय जय हे नाशिनि कामिनि सर्वफलप्रद शास्त्रमये। दुर्गति जयजय रथगजसुरगपदाति समावृत परिजन मँडित लोकसुते।। हरिहर ब्रह्मसुपूजित सेवित तापनिवारिणि पादयुते । मधुसूदनकामिनि गजलक्ष्मीरूपेण सदा पालयमाँ।। जय जय हे अयिखगवाहिनि मोहिनि चक्रिणि रागविवर्धिनि ज्ञानमये। गुणगण वारिधि लोकहितैषिणि स्वरसप्त भूषित गाननुते।। सकल सुरासुरु देव मुनीश्वर मानव वँदित पादयुते। मधुसूदनकामिनि सँतानलक्ष्मी सदा पालयमाँ। । जय जिय हे सद्गुणदायिनि ज्ञान विकासिनि ज्ञानमये। जयजय कमलासनि अनुदिनमर्चित कुँकुमधूसर भूषित वासित वाद्यनुते।।  कनकधारास्तुति वैभव वँदित शँकर देशिक मान्यपदे। मधुसूदनकामिनि विजयलक्ष्मी सदा पालयमाँ ।। जय जय हे सुरेश्वरि भारति भार्गवि शोकविनाशिनि रत्नमये। प्रणत ক্রতনিগুণতা शाँति समावृत हास्यमुखे।। मणिमय भूषित नवनिधि टायिनि कलिमलहारिणि कामित फलप्रद हस्तयते - ShareChat