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#शायरी गुलजार #गुलजार शायरी
शायरी गुलजार - तुम्हारी मर्ज़ी बिना वक़्त भी अपाहज है न दिन खिसकता है आगे॰ न आगे रात चले न जाने उँगली छुडा के निकल गया ೯೫ ` बहुत कहा था অমান ম মাথ মাথ বল 9 GULZNR POCM S तुम्हारी मर्ज़ी बिना वक़्त भी अपाहज है न दिन खिसकता है आगे॰ न आगे रात चले न जाने उँगली छुडा के निकल गया ೯೫ ` बहुत कहा था অমান ম মাথ মাথ বল 9 GULZNR POCM S - ShareChat